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देखना ख़ुद को दर्पण में, कैमरे की नज़र से…

सामान्य

देखना ख़ुद को दर्पण में, कैमरे की नज़र से
( self photographs by ravi kumar, rawatbhata )

अभी कुछ दिनों पहले जयपुर प्रवास के दौरान एक अलसुबह, जबरदस्ती कराए गये स्नान के बाद, खिडकी से आती धूप की एक लहर के साये में ख़ुद को दर्पण में देखा. हाथ में कैमरा था, उसने भी अपनी नज़र ड़ाली…और ये छायाचित्र नमूदार हो गये…

देखिए, धूप का साया कैसी अभिव्यंजना रचता है…
साधारण को कैसी असाधारण आभा से भर देता है…

छाया चित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

छाया चित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

छायाचित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

छायाचित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

छायाचित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

छायाचित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

छायाचित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

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रवि कुमार

फिर से लौटेंगे भेड़िए – रवि कुमार

सामान्य

फिर से लौटेंगे भेड़िए – रवि कुमार
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

एक कविता पोस्टर ख़ुद की कविता पर भी लिख मारा था.

इस बार अपनी कोई कविता ही देना चाहता था, सोचा चलो यह पोस्टर ही पोस्ट कर दूं.

बडे़ आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें……

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रवि कुमार