Tag Archives: पिता

अनुभवी पिता की सीख – शिवराम

सामान्य

अनुभवी पिता की सीख

रेखाचित्र - रवि कुमार, रावतभाटा

एक चुप्पी
हजार बलाओं को टालती है
चुप रहना सीख
सच बोलने का ठेका
तूने ही नहीं ले रखा है

दुनिया के फटे में टांग अडाने की
क्या पडी है तुझे
मीन मेख मत निकाल
जैसे और निकाल रहे हैं
तू भी अपना काम निकाल

जैसा भी है
यहां का तो यही दस्तूर है
ये नैतिकता-फैतिकता का चक्कर छोड़
सब चरित्रवान भूखों मरते हैं
कोई धन्धा पकड़
एक के दो, दो के चार बना
सिद्वान्त और आदर्श नहीं चलते यहां
ये व्यवहार की दुनिया है
व्यावहारिकता सीख
अपनी जेब में चार पैसे कैसे आएं
इस पर नजर रख

‘‘मतलब पड़ने पर
गधे को भी बाप बनाना पड़ता है’’
यह कहावत अब पुरानी पड़ गई है
अब कोई गधा बाप बनना पसन्द नहीं करता
आजन्म कुंवारा रहता है
जिन्दगी को भोगता है
बाप का तमगा लिए नहीं फिरता है
इसलिए मतलब पड़ने पर
अब गधे को बाप नहीं
किसी सभा का अध्यक्ष बनाया जाता है
और बताया जाता है
कि ऐसे महापुरूष धरती पर कभी-कभी ही
अवतरित होते हैं
तू भी यह करना सीख

अक्ल का दुश्मन मत बन
ये दीन-दुनिया, देश और समाज के गीत गाना छोड़
किसी बड़े आदमी की दुम पकड़
बड़ा आदमी बन
तेरे भी दुम होगी
दुमदार होगा तो दमदार भी होगा
दुम होगी तो दुम उठाने वाले भी होंगे
रुतबा होगा
कार-कोठी-बंगले भी होंगे
इसीलिए कहता हूं
ऐरों-गैरों नत्थूखैरों को मुँह मत लगा

जो सुख चावे जीव कू तो भौंदू बन के रह
हिम्मत और सूझबूझ से काम ले
और भगवान पर भरोसा रख

शिवराम

०००००
प्रस्तुति – रवि कुमार