Tag Archives: कविता-पोस्टर

वे ही देखते हैं मुक्ति के स्वप्न – कविता पोस्टर

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वे ही देखते हैं मुक्ति के स्वप्न

( शिवराम की कविता-पंक्तियों पर एक कविता-पोस्टर )

००००० रवि कुमार

उन्हें बिटिया मुर्मू पहचानों – निर्मिला पुत्तुल

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उन्हें बिटिया मुर्मू पहचानों – निर्मिला पुत्तुल
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

कोलाज़ - रवि कुमार, रावतभाटा

( यह कंप्युटर अनुप्रयोगों द्वारा तैयार किया गया एक कोलाज़ है )

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रवि कुमार

मज़दूरों का ढ़ला पसीना – यादवचन्द्र

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मज़दूरों का ढ़ला पसीना – यादवचन्द्र
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

यादवचन्द्र पाण्डे़य की कविता पंक्तियों पर बनाया गया एक कविता पोस्टर…

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कविता पोस्टर - रवि कुमार

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रवि कुमार

अभी तो राह में सारा जहान आयेगा – शकूर अनवर

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अभी तो राह में सारा जहान आयेगा – शकूर अनवर
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

इस बार प्रस्तुत है, कोटा के ही अज़ीम शायर शकूर अनवर के अश्आर पर बनाया हुआ एक पोस्टर.

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रवि कुमार

मुझे कुछ और गीत भी गाने होंगे – कविता पोस्टर

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मुझे कुछ और गीत भी गाने होंगे – प्राण गुप्त
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

इस बार प्रस्तुत है, प्राण गुप्त के गीत की कुछ पंक्तियों पर बनाया गया एक पोस्टर…

कविता पोस्टर - रवि कुमार, रावतभाटा

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रवि कुमार

माटी मुळकेगी एक दिन – शिवराम

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माटी मुळकेगी एक दिन – शिवराम
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

शिवराम की ही एक कविता पर बनाया हुआ एक कविता-पोस्टर यहां प्रस्तुत है. वर्तमान परिदृश्य में स्वप्नों को कायम रखते हुए, श्रमजीवीगण की मुक्तिकामी जुंबिशों में उम्मीद बनाए रखती इन कुछ पंक्तियों को आप भी देखिए…

आशा है कुछ बेहतर महसूस हो…

कविता पोस्टर - रवि कुमार, रावतभाटा

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रवि कुमार

उन्हें सलाम – महेन्द्र नेह – कविता पोस्टर

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उन्हें सलाम – महेन्द्र नेह
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं के पीछे होता यह है कि इन शब्दों ने हमारे सोचने के तरीके पर कुठाराघात किया है, हमें हमारी सीमाएं बताई हैं, और हमारी छाती पर चढ़ कर कहा है, देखो ऐसे भी सोचा जा सकता है, ऐसे भी सोचा जाना चाहिए.
जाहिर है कविता इस तरह हमारी चेतना के स्तर के परिष्कार का वाइस बनती है.

इस बार का कविता-पोस्टर है, महेन्द्र नेह की ऐसी ही कविता पंक्तियों का.

कविता पोस्टर - रवि कुमार, रावतभाटा

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रवि कुमार

ना सहाय कोई देवता, न कोई ईश-विमर्श : शिवराम

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ना सहाय कोई देवता, न कोई ईश-विमर्श : शिवराम
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं के पीछे होता यह है कि इन शब्दों ने हमारे सोचने के तरीके पर कुठाराघात किया है, हमें हमारी सीमाएं बताई हैं, और हमारी छाती पर चढ़ कर कहा है, देखो ऐसे भी सोचा जा सकता है, ऐसे भी सोचा जाना चाहिए.
जाहिर है कविता इस तरह हमारी चेतना के स्तर के परिष्कार का वाइस बनती है.

इस बार का कविता-पोस्टर है, शिवराम की ऐसी ही दोहा पंक्तियों का.

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शिवराम के दोहे

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रवि कुमार

फिर भी हिस्से आएँ हमारे सिसकियाँ – शिवराम

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फिर भी हिस्से आएँ हमारे सिसकियाँ – शिवराम
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं के पीछे होता यह है कि इन शब्दों ने हमारे सोचने के तरीके पर कुठाराघात किया है, हमें हमारी सीमाएं बताई हैं, और हमारी छाती पर चढ़ कर कहा है, देखो ऐसे भी सोचा जा सकता है, ऐसे भी सोचा जाना चाहिए.
जाहिर है कविता इस तरह हमारी चेतना के स्तर के परिष्कार का वाइस बनती है.

इस बार का कविता-पोस्टर है, शिवराम की ऐसी ही कविता पंक्तियों का.

बडे़ आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें……

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रवि कुमार