पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो

सामान्य

पढ़ना-लिखना सीखो

( सफ़दर हाशमी का यह मशहूर गीत बहुत लोकप्रिय हुआ है. काफ़ी पहले दूरदर्शन पर इसकी प्रस्तुति ने इसे ज़्यादा आम किया था, पर उसमें कुछ कांट-छांट भी की गई थी. आंदोलनकारी और नुक्कड़ नाटक समूहों का तो यह मुख्य गीत हुआ करता ही था. अभी कुछ परिस्थितियों के मद्देनज़र यह याद आया तो इसे यहां प्रस्तुत करने की आवश्यकता महसूस हुई, ताकि जिन्हें जरूरत लगे इसका उपयोग किया जा सके. )

पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो
पढ़ना-लिखना सीखो ओ भूख से मरने वालो

क ख ग घ को पहचानो
अलिफ़ को पढ़ना सीखो
अ आ इ ई को हथियार
बनाकर लड़ना सीखो

ओ सड़क बनाने वालो, ओ भवन उठाने वालो
खुद अपनी किस्मत का फैसला अगर तुम्हें करना है
ओ बोझा ढोने वालो ओ रेल चलने वालो
अगर देश की बागडोर को कब्ज़े में करना है

क ख ग घ को पहचानो
अलिफ़ को पढ़ना सीखो
अ आ इ ई को हथियार
बनाकर लड़ना सीखो

पूछो, मजदूरी की खातिर लोग भटकते क्यों हैं?
पढ़ो,तुम्हारी सूखी रोटी गिद्ध लपकते क्यों हैं?
पूछो, माँ-बहनों पर यों बदमाश झपटते क्यों हैं?
पढ़ो,तुम्हारी मेहनत का फल सेठ गटकते क्यों हैं?

पढ़ो, लिखा है दीवारों पर मेहनतकश का नारा
पढ़ो, पोस्टर क्या कहता है, वो भी दोस्त तुम्हारा
पढ़ो, अगर अंधे विश्वासों से पाना छुटकारा
पढ़ो, किताबें कहती हैं – सारा संसार तुम्हारा

पढ़ो, कि हर मेहनतकश को उसका हक दिलवाना है
पढ़ो, अगर इस देश को अपने ढंग से चलवाना है

पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो
पढ़ना-लिखना सीखो ओ भूख से मरने वालो

०००००

सफ़दर हाशमी

12 responses »

  1. पढ़ना और लिखना जाननेवाले लोग ही तो देश के शोषक रहे हैं और आज भी हैं। देश की नीतियाँ तय करनेवाले सब पढ़े-लिखे कहे जाते हैं। इसलिए इनसे लड़ने के लिए भी पढ़ना-लिखा सीखो।

  2. बचपन याद गया,यूँ लगा दूरदर्शन केंद्र से यह गीत जो कहीं गुम सा गया था आज वापस गूँज गया।इसी गीत की तर्ज पर हमने क वर्ण से ज्ञ् तक कविता रची थी जिससे स्कूली बच्चों को हिंदी वर्णमाला याद करने में कुछ आसानी हो सके…
    ऐसी अद्भुत कविता व उसके रचनाकार से परिचय कराने के लिए शुक्रिया रवि जी…

  3. बचपन याद आ गया,यूँ लगा दूरदर्शन केंद्र से यह गीत जो कहीं गुम सा गया था आज वापस गूँज गया।इसी गीत की तर्ज पर हमने क वर्ण से ज्ञ् तक कविता रची थी जिससे स्कूली बच्चों को हिंदी वर्णमाला याद करने में कुछ आसानी हो सके…
    ऐसी अद्भुत कविता व उसके रचनाकार से परिचय कराने के लिए शुक्रिया रवि जी…

  4. भाई रवि बधाई बहुत दिनों बाद सुना ये तो नहीं कहूँगा अक्सर गुनगुनाता रहता हूँ लेकिन आपने सभी को पढवाया तहे दिल से शुक्रिया

  5. पढ़ो, लिखा है दीवारों पर मेहनतकश का नारा
    पढ़ो, पोस्टर क्या कहता है, वो भी दोस्त तुम्हारा
    पढ़ो, अगर अंधे विश्वासों से पाना छुटकारा
    पढ़ो, किताबें कहती हैं – सारा संसार तुम्हारा

    पढ़ो, कि हर मेहनतकश को उसका हक दिलवाना है
    पढ़ो, अगर इस देश को अपने ढंग से चलवाना है

    रवि भाईसा! जब टीवी पर यह गीत बजता था और सरकारी तौर पर बजता था तब सरकार की मंशा पर शक होता था ..सफदर भाई से तो मिलने का अवसर नही मिला पर माला जी के साथ काम करने का अवसर मिला और जन नाट्य मंच की पूरी टीम का प्रस्तुतिकरण मुझे प्रभावित कर गया और माला जी ने व्यक्तिगत तौर पर कहा कि उनके नाटक की मेरी प्रस्तुति ने उन्हें और उनकी टीम को बेहद मुतासिर किया ..गीत को दोबारा इतने करीब से महसूस कराने की बधाइयां..

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