ऐ लड़की – महेन्द्र नेह – कविता पोस्टर

सामान्य

ऐ लड़की – महेन्द्र नेह
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं के पीछे होता यह है कि इन शब्दों ने हमारे सोचने के तरीके पर कुठाराघात किया है, हमें हमारी सीमाएं बताई हैं, और हमारी छाती पर चढ़ कर कहा है, देखो ऐसे भी सोचा जा सकता है, ऐसे भी सोचा जाना चाहिए.
जाहिर है कविता इस तरह हमारी चेतना के स्तर के परिष्कार का वाइस बनती है.

इस बार का कविता-पोस्टर है, महेन्द्र नेह की ऐसी ही कविता पंक्तियों का.

बडे़ आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें……


००००००

रवि कुमार

17 responses »

  1. महेन्द्र नेह जी की अति प्रभावी रचना!!

    आभार इस प्रस्तुति का.

    ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि ‘९०% सीख प्रोत्साहान देता है.’

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

  2. अक्सर चित्रों को शब्दों के सहारे की जरूरत्न अही पड़ती..चित्र स्वयं मे एक कविता होते हैं..मगर जब ऐसी ही एक कविता के साथ हो जायें तो कयामत होती है…जैसे कि यह..

  3. भाई रवि जी अन्यथा ना लें क्योंकि नेह जी गीत बहुत अच्छे लिखतें है
    लेकिन इस कविता के शब्दों में जान नहीं है ओर ना ही प्रभावित करते है

    किन्तु आपके रेखांकन ने शब्दों में जान डाल दी
    आपको धन्यबाद ओर साथ ही नेह जी को आपको आपके परिवार को मेरे ओर मेरे परिवार कि ओर नववर्ष कि ढेरों शुभ कामनाएं

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