हमारी आंखों में ख़ून नहीं उतरता – महेन्द्र नेह

सामान्य

हमारी आंखों में ख़ून नहीं उतरता – महेन्द्र नेह
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)

पिछले दिनों मथुरा में कोटा के ख्यातिनाम गीतकार महेन्द्र नेह की कविता पुस्तक ‘थिरक उठेगी धरती’ का विमोचन संपन्न हुआ था। वहां कविता पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिसमें उनकी कविताओं पर बनाए गए पोस्टर समसामयिक प्रमुखता से थे।

महेन्द्र नेह की कविता पंक्तियों पर बनाया गया एक पोस्टर यहां प्रस्तुत है।

साफ़ देखने के लिए इस पर क्लिक करें:

०००००

रवि कुमार

19 responses »

  1. बहुत सुंदर साहि‍त्‍य ब्‍लॉग बनाया है आपने,ढेर सारी बधाई। महेन्‍द्र नेह की कवि‍ता जो आपने दी है उसे मैं साभार देना चाहता हूँ,आशा है सहयोग करेंगे।
    जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

  2. बहुत अच्छे उदगार भाई नेह के और साथ ही एक सार्थक पोस्टर
    जुल्म होते है तभी नायक पैदा होते है |

    वो सोचते है हर वक़्त नया तर्ज़े ज़फा क्या है |
    हमें देखना है उनके जुल्म की इन्तहा क्या है ||

  3. ‘वे हमारे पांव काट देते हैं और हमारी आंखों में खून नहीं उतरता’

    महेन्द्र नेह की उत्तेजित करती पंक्तियों के सापेक्ष चाौखटों में उकेरा गया भुच्च चेहरा ..कटे हुए पांव…अच्छी जुगलबंदी । आप अच्छा चुन भी रहे हैं और अच्छा बुन भी रहें हैं।

  4. very appreciative rachna,sach mein hiladene wali panktiya hai,kyunki pistol aur bonb kabhi inquilab nahi late kyunki inquilab ki talwar vicharo ki shaan par tez hoti hai,
    As Twinkle says that”THE PEN IS MIGHTIER THAN THE SWORD”.AUR Usko aapki kavita behetarin lagi pls aise hi likhte rehna,
    HATS OFF! to you……….

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