कल्याण ! मानव मात्र का कल्याण !

सामान्य

कल्याण ! मानव मात्र का कल्याण !
(a short story by ravi kumar, rawatbhata)

गुरू जी प्रवचनरत थे.”शास्त्रों के अनुसार…”, वे कह रहे थे,
“धर्म का उद्देश्य मानव कल्याण है.”
चेला मननरत था,बोल उठा,
“मतलब ये गुरू जी कि अपने हिंदू धर्म का उद्देश्य हिन्दुओं का कल्याण करना है.”
गुरू जी थोड़ा सा खीझ गये,
“नासमझ, कल्याण ! मानव मात्र का कल्याण !”
चेला असमंजस में था,
“यानि कि गुरू जी,मानव कल्याण से जो विरत हो वह धर्म नहीं अधर्म है.”
गुरू जी मुस्कुराए, चेला सही दिशा में था.
“यानि कि गुरू जी, हिंदू धर्म यदि किसी अन्य धर्म के मानव मात्र के कल्याण
की गारन्टी नही दे सकता तो वह भी धर्म नही अधर्म है?”
गुरू जी के माथे पर बल पड गये.
“यानि कि धर्म की ध्वजा उठाये ये सब लोग जो नफ़रत फैला रहे हैं, मार-काट
मचा रहे हैं, असल में सभी अधर्मी हैं गुरू जी?”

चेला पूरी श्रद्धा से गुरू जी की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहा था.
पांडा़ल स्तब्ध था.
गुरू जी आंखें चौडा़ए चुप थे.

०००००
रवि कुमार

16 responses »

  1. कदाचित उत्सुकतावश आपकी लघुकथा में थोडा परिवर्तन कर रहा हूँ . जनता हूँ ये ध्रष्टता है फिर भी . अंत में जो नोट जोड़ा है बो भी कथा काम ही हिस्सा है .
    ————————————————

    गुरू जी प्रवचनरत थे.”शास्त्रों के अनुसार…”, वे कह रहे थे,“धर्म का उद्देश्य मानव कल्याण है.”
    चेला मननरत था,बोल उठा,“मतलब ये गुरू जी कि अपने हमारे धर्म का उद्देश्य स्वधर्मियों का कल्याण करना है.”
    गुरू जी थोड़ा सा खीझ गये,
    “नासमझ, कल्याण ! मानव मात्र का कल्याण !”
    चेला असमंजस में था,
    “यानि कि गुरू जी,मानव कल्याण से जो विरत हो वह धर्म नहीं अधर्म है.”
    गुरू जी मुस्कुराए, चेला सही दिशा में था.“यानि कि गुरू जी, अपना धर्म यदि किसी अन्य धर्म के मानव मात्र के कल्याणकी गारन्टी नही दे सकता तो वह भी धर्म नही अधर्म है?”
    गुरू जी के माथे पर बल पड गये. “यानि कि धर्म की ध्वजा उठाये ये सब लोग जो नफ़रत फैला रहे हैं, मार-काट
    मचा रहे हैं, असल में सभी अधर्मी हैं गुरू जी?”
    चेला पूरी श्रद्धा से गुरू जी की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहा था.
    पांडा़ल स्तब्ध था.गुरू जी आंखें चौडा़ए चुप थे.
    नोट : केवल भाषागत बंधनों के कारण शास्त्र, धर्म , गुरु , चेला , धर्मध्वजा इत्यादि शब्द आये हैं अन्यथा किसी भी भाषा , धर्म और वाद के समानार्थक शब्द ले लीजिये कथा सर्वथा सत्य है.
    ——————————-

  2. Har gigyasha shant ho, yeh aavasyak nahi hai. Bat Samajhne ki hai, Guru bhi samajh gaya aur Chela bhi. Pandal mein Sab Ke Sab samajh bhi nahi sakte. Matbhaid manav pravarti hai isliye laghu katha ka ant sahi jagah par hua hai.

    Katha likhane ka updesh sarthak hua. Badhaye Swikar Kare.

  3. सुन्दर अति सुन्दर मित्रवर
    दिल को छू लिया आपकी कविता ने
    आपको तहे दिल से धन्यबाद
    की मेरे मन को जो सुकून इस कविता को पढने में मिला है
    उसकी मैं अभिव्यक्ति शब्दों में नहीं कर सकता
    पुनः धन्यबाद

  4. भगत भाई को यह कविता नजर आती है! साफ साफ और ईमानदारी से कहूँ तो यह लघुकथा बेजान सी लगी। शायद मैं इसके अर्थ को समझने में या वहाँ तक जाने में असफल रहा।

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